जान भी निकाल लेते हैं लू के थपेड़े


लू के थपेड़ों से शरीर का शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें तत्काल मरीज का ठीक से इलाज न हो तो उसकी जान भी जा सकती है। 
क्या है हीट स्ट्रोक या सन स्ट्रोक 
लू लगने या बहुत देर तक तेज धूप में रहने के कारण शरीर का तापमान असामान्य तेजी से बढ़ता है। शरीर डिहाईड्रेशन यानी निर्जलीकरण की स्थिति में पहुंच जाता है। मरीज के नर्वस सिस्टम में परिवर्तन आ जाते हैं। मरीज के शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली फेल हो जाती है। थर्मामीटर से नापने पर शरीर का तापमान 104-105 डिग्री तक पाया जाता है। तेज धूप में पसीना निकलने पर पानी नहीं पीना भी घातक हो सकता है। 
क्या होते हैं लक्षण 
हीट स्ट्रोक से पीडि़त मरीज के शरीर में ऊर्जा बहुत कम रह जाती है। वह बहुत थकान महसूस करता है साथ ही उसकी मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है। 
1. मरीज भ्रम और उलझन का शिकार हो जाता है।
2. चिड़चिड़ा और गुस्सेल हो जाता है
3. उसके शरीर और मस्तिष्क का तालमेल गड़बड़ा जाता है
4. मरीज को अपने हाथ पैरों की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं रहता है।
5. पसीना निकलना बंद हो जाता है। 
6. सबसे गंभीर स्थिति में मरीज कोमा में चला जाता है।
किन्हें है अधिक जोखिम लू लगने का
नवजात शिशु, बुजुर्ग और एथलीटों को लू लगने का जोखिम अधिक होता है। इसके अलावा धूप में काम करने वाले मजदूरों के शरीर का तापमान बहुत अधिक हो जाता है। धूप में खड़ी की गई कार में बंद छोटे बच्चे भी हीट स्ट्रोक के जोखिम पर होते हैं 
क्योंकि बंद कार का तापमान बहुत जल्दी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।
जो मरीज किसी रोग की दवाएं ले रहे हैं और धूप में काम कर रहे हों तो उन्हें हीट स्ट्रोक होने की आशंका अधिक रहती है। ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए ली जा रही दवाएं जैसे बीटा ब्लॉकर्स, मूत्रवर्धक दवाएं (डाययूरेटिक्स) या मानसिक अवसाद को ठीक करने के लिए ली जा रही दवाएं लू लगने के जोखिम को बढ़ा देती हैं।
कई बीमारियां भी लू के लक्षणों को बढ़ा देती हैं
असाध्य बीमारियां जैसे दिल की बीमारी या फेफड़ों की कोई बीमारी हीट स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाती हैं। इसी तरह मोटापे के शिकार मरीज या आरामतलब जीवन बिताने वालों को हीट स्ट्रोक की आशंका अधिक होती है।
क्यों होता है हीट स्ट्रोक
हमारा शरीर सामान्य तौर पर एक निश्चित तापमान पर स्थिर रहता है। भोजन से प्राप्त ऊर्जा के कारण शरीर का तापमान बढ़ता है जिसे त्वचा से निकलने वाले पसीने के जरिए संतुलित किया जाता है। शरीर का तापमान बढऩे के साथ यदि डिहाईड्रेशन भी हो जाए तो शरीर से पसीना निकलना बंद हो जाता है और तापमान कम नहीं होने पाता।
शरीर का तापमान बढऩे पर इन लक्षणों पर ध्यान दें। कई लोगों में हीट स्ट्रोक के लक्षण बहुत तेजी से और एकाएक उभरते हैं।
1. अलाइयां
2. मांसपेशियों में ऐंंठन 
3. बेहोश होना
4. मितली आना
5. उल्टियां होना
6. थकान होना
7.कमजोरी महसूस होना
8. तेज सिरदर्द होना
9. जोड़ों में दर्द होना
10 .चक्कर आना
छोटे बच्चों में हीट स्ट्रोक
बुजुर्गों की तरह नवजात शिशु, छोटे बच्चे भी हीट स्ट्रोक के जोखिम पर होते हैं। कई बार सोते हुए बच्चे को कार में बंद करके माता-पिता शॉपिंग के लिए निकल जाते हैं। इस स्थिति में कार में बंद बच्चे हीट स्ट्रोक के शिकार हो जाते हैं। बहुत अपवाद स्वरूप नवजात शिशु यदि तेज गर्मी में यदि बहुत मोटे कपड़ों से कसकर लपेट दिए जाएं तो उनकी पसलियों को सांस लेने के लिए फैलने का मौका नहीं मिल पाता है। कुछ बड़े बच्चे तथा टीन एजर भी यदि धूप में अधिक देर तक खेलकूद में लगे रहें तो उन्हें हीट स्ट्रोक होने का जोखिम रहता है। 
क्या है उपचार 
मरीज को छांव में ले जाएं और उसके कपड़े उतार दें। उसके बदन को ठंडे पानी से भीगे अंगोछे से पोछें ताकि शरीर का तापमान तेजी से कम हो सके। मरीज को पंखे के नीचे लिटाकर पूरे बदन को भीगे हुए पतले कपड़े से ठंक दें ताकि तापमान तेजी से गिर जाए। मरीज के शरीर पर ठंडे पानी का स्प्रे भी कर सकते हैं। कांख और दोनों जांघों के बीच के हिस्से में आइस पैक रखें। यदि मरीज पीने की स्थिति में हो तो उसे ठंडा पानी और शरबत आदि पीने को दें। थोड़ी-थोड़ी देर में मरीज के शरीर का तापमान थर्मामीटर से चौक करें।
क्यो हो सकती हैं जटिलताएं
हीट स्ट्रोक की वजह से कई जटिलताएं उत्पन्ना होती हैं। यह इस पर निर्भर है कि शरीर का तापमान कितनी देर तक बढ़ा हुआ रहा है। 
1. शरीर का तापमान तेजी से कम न हो तो हीट स्ट्रोक की वजह से महत्वपूर्ण अवयव क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इनमें मस्तिष्क सहित कई महत्वपूर्ण अवयवों में सूजन आ जाती है। कई बार इनमें स्थाई क्षति भी हो जाती है। 
2. यदि सही समय पर ठीक इलाज न हो तो मरीज की जान भी चली जाती है। 
क्या रखें सावधानियां
1. गर्मियों में ढीले और हल्के कपड़े पहनें। टाइट फिट कपड़ों में शरीर का तापमान ठंडा नहीं होने पाता है। 
2. सनस्क्रीन का प्रयोग करें। इसे हर दो घंटों में रिपीट करें। 
3. सनबर्न से बचने के लिए सिर पर छतरी ले लें या बड़े आकार का हैट लगा लें। 
4. पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहें। पानी या जूस जैसे तरल पदार्थों से शरीर को पसीना निकालने में मदद मिलती है। इसी से नॉर्मल बॉडी टेंपरेचर बनाए रखा जा सकता है।
5. यदि गर्मी की तेज धूप में कोई काम करना ही पड़े तो पानी पीते रहें और समय-समय पर छांव में रेस्ट भी करें।

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